श्रीगंगा सभा द्वारा हरकी पैड़ी पर आयोजित श्रीमद् भागवत में कथाव्यास ने सुनाया श्रीकृष्ण प्रकोटोत्सव का प्रसंग
प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक विकास को संजोकर आगे बढ़ना है-स्वामी रामदेव
श्रीगंगा सभा द्वारा हरकी पैड़ी पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन योग गुरू स्वामी रामदेव ने कथा पंडाल पहुंचकर व्यासपीठ का पूजन किया। स्वामी रामदेव ने कथा व्यास वैष्णवाचार्य पुण्डरी गोस्वामी के कथा वाचन की चर्चा करते हुए कहा कि वे हमेशा हमारी प्राचीन विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे है। उन्होने कहा कि हमारे तो डीएनए में ही देवत्व, रामत्व, राधत्व, शिवत्व और सनातन के शाश्वत सत्य सनिहित है। उन्होने कहा कि हमारे आचार विचार, आहार, व्यवहार में हिन्दुत्व है। उन्होने कहा कि प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक विकास को संजोकर आगे बढ़ना है। श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने स्वामी रामदेव का स्वागत किया। उन्होने कथा के मुख्य यजमान अमृतसर के अग्रवाल परिवार के साथ सभी के लिए मंगलकामना की। कथाव्यास मन्माध्व गौडेश्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने श्रद्धालु भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए भाव विभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ गया और धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर अधर्म का नाश करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से समस्त प्रजा भयभीत थी। देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया गया था। उसी कारागार में भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण ने दिव्य रूप में जन्म लिया। कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानवता को प्रेम, करुणा और धर्म का संदेश देने के लिए हुआ था। कथा के अंत में श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भजनों पर झूम उठे और भगवान श्रीकृष्ण की आरती में शामिल हुए। कथा श्रवण करने वालों में श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, उपाध्यक्ष हनुमंत झा, स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि, समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान, उज्जवल पण्डित, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों के सहित बड़ी संख्या में श्रद्वालु मौजूद रहे।

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