मानवता के नवजागरण का आधार हैं पूज्य आचार्यश्री: शैफाली पण्ड्या
दो दिवसीय गुरुपूर्णिमा पर्व का शुभारंभ, गुरुधाम शांतिकंुज पहुंचे हजारांे गायत्री साधक
करोड़ों गायत्री साधकों की आस्था के प्रमुख केन्द्र शांतिकुंज में मंगलवार से दो दिवसीय गुरुपूर्णिमा पर्व का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। प्रातःकाल माँ गायत्री की आरती, ध्यान साधना एवं सामूहिक उपासना के साथ पर्व का शुभारंभ हुआ। वहीं विश्व कल्याण और सर्वे भवन्तु सुखिनः की मंगलकामना से चैबीस घंटे के अखण्ड गायत्री महामंत्र जप में देश-विदेश से आए एक हजार से अधिक साधकों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर साधकों को संबोधित करते हुए शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष-2026 युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का महाअभियान है। यह उनके आदर्शों को जीवन में उतारते हुए व्यक्ति, परिवार और समाज के नव निर्माण का संकल्प वर्ष है। उन्होंने कहा कि संस्कार, सेवा, साधना, पर्यावरण संरक्षण, नारी जागरण तथा युवा चेतना से जुड़े रचनात्मक अभियानों को जन-जन तक पहुँचाना है। देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री ने विचार-क्रांति का जो दीप प्रज्वलित किया था, उसे और अधिक प्रखर बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष की कार्य योजना एवं उत्तरदायित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इससे पूर्व गुरुपूर्णिमा पर्व के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज की महिला मण्डल प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने कहा कि युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपना सम्पूर्ण जीवन मानवता के उत्थान और विश्व में सद्भावना के विस्तार के लिए समर्पित किया। उन्होंने अपने तप, त्याग, प्रेम और दूरदर्शी चिंतन के आधार पर अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना की, जो आज एक विराट वटवृक्ष के रूप में विश्वभर में संस्कार, सेवा और साधना का संदेश पहुँचा रहा है। उन्होंने पूज्य गुरुदेव के विचारों को जीवन में उतारते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र के नव निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर देवसंस्कृति दिग्दर्शन के नवीन स्वरूप का लोकार्पण किया।
शांतिकंुज मीडिया के अनुसार गुरुपूर्णिमा पर्व का मुख्य कार्यक्रम बुधवार को होगा। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुधाम शांतिकुंज पहुँचे हैं।












