हरिद्वार, 7 जून। श्री राधा रसिक बिहारी भागवत परिवार सेवा ट्रस्ट की और से शिवालिक नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि गोवर्धन पूजन से भगवान श्रीकृष्ण ने प्रकृति का संवर्धन करने की प्रेरणा दी है। शास्त्री ने कथा का श्रवण कराते हुए बताया कि श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र का पूजन करने जा रहे बृजवासियों से पूछा कि इंद्र का पूजन करने से क्या होता है। बृजवासियों ने कहा इंद्र बरसात के देवता है। बारिश होती है तो हरी-हरी घास उत्पन होती है। उस घास को खाकर गाय दूध देती है और हम दूध, दही, माखन बेच कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। श्रीकृष्ण ने बृजवासियों से पूछा कि आपने देवराज इंद्र को कभी देखा है तो ब्रजवासियों ने मना कर दिया। श्रीकृष्ण ने कहा जिसको देखा नहीं है। उसका पूजन करने से क्या लाभ। साक्षात दर्शन देने वाले गोवर्धन पर्वत हमारे प्रत्यक्ष देव हैं। गोवर्धन पर्वत के ऊपर पेड़, पौधे और हरियाली के रूप में प्रकृति कारण हम श्वास ले पा रहे हैं और जीवित हैं। हमारी गौमाता के लिए घास की व्यवस्था भी प्रकृति ही करती है। इसलिए हम सब को प्रकृति का पूजन करना चाहिए। श्रीकृष्ण के कहने पर बृजवासियों ने गोवर्धन का पूजन किया। शास्त्री ने बताया कि वर्तमान में प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण स्वास्थ्य समेत अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए सभी को प्रकृति की रक्षा एवं सुरक्षा का संकल्प लेना चाहिए। मुख्य यजमान किरण गुप्ता, अशोक गुप्ता, डा. अंशु गुप्ता, डा.राजकुमार गुप्ता, मिशिका गुप्ता, मिहिका गुप्ता, पंडित हेमंत कला, पंडित दयाकृष्ण शास्त्री, पंडित संजय शास्त्री, अतुल कपूर आदि ने भागवत पूजन किया।

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