नेपाल आपदा में शांतिकुंज बना मदद का सहारा, प्रभावित परिवारों तक पहुंच रही राहत


नेपाल में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के बीच राहत और सेवा का सिलसिला जारी है। विपदा की इस घड़ी में गायत्री तीर्थ शांतिकुंज ने मानवीय संवेदना के साथ मदद का हाथ बढ़ाया है। अखिल विश्व गायत्री परिवार की आपदा राहत टीम प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध करा रही है। राहत के साथ कार्यकर्ता पीड़ितों को यह भरोसा भी दे रहे हैं कि संकट की इस घड़ी में अखिल विश्व गायत्री परिवार उनके साथ खड़ा है।


आपदा के बाद अनेक परिवारों के सामने भोजन, दैनिक उपयोग की सामग्री और सुरक्षित जीवन की चुनौती खड़ी हुई है। ऐसे समय में शांतिकुंज की टीम स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप राहत कार्यों को आगे बढ़ा रही है। नेपाल में गायत्री परिवार से जुड़े कार्यकर्ता भी प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। शांतिकुंज परिवार अपने आराध्यदेव परमपूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के ‘पीड़ित मानवता की सेवा ही सच्ची साधना’ के संदेश को आधार मानकर सेवा कार्य में जुटा है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख श्रद्धेया शैलजीजी एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या नेपाल राहत दल के साथ लगातार संपर्क में हैं। अपने संदेश में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि आपदा की घड़ी में पीड़ित मानवता के साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवीय पहल है। प्रत्येक कार्यकर्ता करुणा और संवेदना के साथ जरूरतमंदों की सहायता के लिए तत्पर है। सेवा का मूल उद्देश्य केवल राहत सामग्री पहुंचाना नहीं, बल्कि संकट से जूझ रहे परिवारों को आत्मीयता और मानसिक संबल देना भी है।
शांतिकुंज मीडिया विभाग के अनुसार डॉ. चिन्मय पंड्या के मार्गदर्शन में राहत एवं सेवा अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। शांतिकुंज आपदा राहत टीम के साथ 100 से अधिक स्वयंसेवक दिन-रात सेवा-सहयोग में जुटे हैं। टीम का मुख्य बेस कैंप काठमांडू में है, जबकि दूसरा कैंप विदुर, पीपलटार में बनाया गया है। यहां से प्रतिदिन करीब एक हजार प्रभावित लोगों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है।
राहत कार्य में स्थानीय प्रशासन और सेना भी सहयोग कर रही है। उनके समन्वय से प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और भोजन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। शांतिकुंज की टीम स्थानीय जरूरतों का आकलन करते हुए आगे की राहत योजना तैयार करने में जुटी है।


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