योग का कीर्तिमान, विश्व एकता का आह्वान जन्मशताब्दी महोत्सव में भारतीय संस्कृति का विराट उद्घोष
इंडिया एवं एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ सामूहिक प्रज्ञा योग, देश-विदेश के विशिष्ट अतिथियों ने किया माताजी के आदर्शों को नमन
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी महोत्सव का दूसरा दिन योग, आध्यात्मिक चेतना और विश्व बंधुत्व के ऐतिहासिक संदेश का साक्षी बना। समारोह का शुभारंभ सामूहिक ध्यान-साधना और 16 स्थितियों वाले प्रज्ञा योग के भव्य प्रदर्शन से हुआ। प्रशिक्षित साधकों की सामूहिक सहभागिता का नया कीर्तिमान इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एवं एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। इसका प्रमाण पत्र देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या को प्रदान किया गया।


इस अवसर पर समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वास्तविक ज्ञान मनुष्य की आत्मा में प्रतिष्ठित है। योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मिक उत्कर्ष और जीवन परिवर्तन का माध्यम है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि दिल्ली आज योग नगरी और संस्कृति नगरी के रूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने गुरुदेव-माताजी के तप, त्याग और युग निर्माण के विचारों को समाज परिवर्तन की प्रेरक शक्ति बताया।
समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू ने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ को वैश्विक एकता का आधार बताते हुए कहा कि विश्व की चुनौतियों का समाधान आपसी सहयोग और संवेदनशीलता में निहित है। ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड क्रिश रावल और लॉर्ड रसेल रुक ने भारतीय अध्यात्म, योग और ध्यान को विश्व शांति का महत्वपूर्ण मार्ग बताया। चर्च ऑफ इंग्लैंड के एंग्लिकन बिशप राइट रेवरेंड लूसा ने मानवता को एक परिवार मानकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। लॉर्ड रसेल रुक ने डॉ. चिन्मय पण्ड्या को वर्ष 2027 में ब्रिटेन में आयोजित होने वाले जी20 कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया।
इस अवसर पर स्टेडियम के समीप 835वें रविवारीय पौधारोपण कार्यक्रम में दलनायक सहित अतिथियों ने सहभागिता कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

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