भगवान शिव ही संसार के सृजनकर्ता, पालक और संहारक हैं-स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि
जस्साराम रोड़ स्थित श्री जगद्गुरू उदासीन आश्रम के 55वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि ने कहा कि भगवान शिव ही इस संसार के सृजनकर्ता, पालक और संहारक हैं। शिव को पंचदेवों में प्रधान और परमेश्वर के रूप में स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि तमाम दोषों से युक्त कलयुग में भगवान शिव की सच्ची भक्ति और ओम नमः शिवाय का मंत्र का जाप ही मोक्ष का मार्ग है। शिव महापुराण कथा का श्रवण और मनन करते हुए कथा से मिले ज्ञान को आचरण में धारण करने से कलयुग के दुष्प्रभावों से बचाव संभव है। भगवान शिव की नगरी हरिद्वार के गंगा तट पर संतों के सानिध्य में कथा श्रवण से प्राप्त होने वाला पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। कथाव्यास पंडित लक्ष्मी नारायण शास्त्री ने शिव पार्वती विवाह की पूर्णता, कार्तिकेय जन्म, तारकासुर वध, शिव महिमा, पंचाक्षर मंत्र, शिव पूजन और पार्थिव शिवलिंग आदि प्रसंग सुनाते कहा कि सेवा ही जीवन मे सुख, शांति और सफलता का मार्ग है। माता, पिता और गुरू की सेवा तथा भगवान शिव की आराधना सबसे बड़ा धर्म है। माता, पिता और गुरू की सेवा तथा भगवान शिव की आराधना से तत्काल शुभ फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश ने अपने माता पिता शिव पार्वती की परिक्रमा कर प्रथम पूज्य का अधिकार प्राप्त किया। मुख्य यजमान कान्ता दुग्गल, नितिन दुग्गल, तरूण तुग्गल, चीतेश दुग्गल ने सभी संतों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी ज्योर्तिमयानंद, साध्वी नाराण गिरी, भावना सखेड़ी, महेन्द्र सेठी, समाजसेवी राजेंद्र शर्मा सहित कई संत महंत मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *