शांतिकुंज और देसंविवि में मनाई गई धन्वंतरि जयंती
स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित खानपान और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का संदेश
हरिद्वार 7 नवंबर। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज और देव संस्कृति विश्वविद्यालय में धन्वंतरि जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि का पूजन किया गया और सभी के अच्छे स्वास्थ्य एवं सुखी जीवन की कामना की गई।
अपने संदेश में आयुर्वेद की महत्ता बताते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या व श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि यह केवल बीमारियों के उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की पद्धति भी है। उन्होंने खानपान, रहन-सहन और विचारों में अच्छे बदलाव लाने पर जोर दिया।
शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित कार्यक्रम में भगवान धन्वंतरि के जीवन और आयुर्वेद में उनके योगदान को याद किया गया। इस दौरान शांतिकंुज के चिकित्सकों ने कहा कि स्वस्थ रहना केवल बीमारी से दूर रहने तक सीमित नहीं है। इसके लिए शरीर और मन दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी है। संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या, अच्छी सोच और संयमित जीवनशैली इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शांतिकुंज के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कहा कि प्रकृति के अनुकूल जीवन जीने और छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाने से कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। समय पर भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और आत्मसंयम स्वस्थ जीवन के जरूरी आधार हैं।
कार्यक्रम में शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेंद्र गिरी, प्रो. प्रमोद भटनागर, डॉ. मंजुश्री, डॉ. शिवानंद साहू, डॉ. वंदना श्रीवास्तव, डॉ. अलका सहित शांतिकुंज एवं देसंविवि के कार्यकर्ता और गायत्री परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।












