विजयदशमी पर आएसएस ने निकाला पथ संचलन
विजयदशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा दयानंद बस्ती में भव्य पथ संचलन निकाला गया। लोगों ने पथसंचलन में शामिल स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इससे पूर्व विधि विधान के साथ शस्त्र पूजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और नगर के प्रबुद्ध नागरिक शामिल रहे। मुख्य वक्ता प्रांत प्रचारक डा.शैलेंद्र ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस ऐतिहासिक वर्ष में गांव गांव तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। शहरों में बस्ती-बस्ती तक संपर्क और शाखा विस्तार का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का मुख्य कार्य व्यक्ति निर्माण है, जो पिछले सौ वर्षों से निरंतर चल रहा है और आगे भी जारी रहेगा। डा.शैलेंद्र ने कहा कि शाखा पद्धति संघ की रीढ़ है। शाखा के माध्यम से ही एक सामान्य व्यक्ति में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, समर्पण और सेवा भाव जैसे सद्गुणों का निर्माण होता है। शाखा वह स्थान है जहां जाति, पंथ, भाषा से ऊपर उठकर सभी स्वयंसेवक एक साथ राष्ट्र चिंतन करते हैं। उन्होंने कहा कि देश विरोधी, राष्ट्र विरोधी और धर्म विरोधी शक्तियां सबसे पहले राष्ट्र की एकता और अखंडता के सबसे प्रबल पक्षधर संघ का ही विरोध करती हैं। संघ शक्ति की उपासना में विश्वास करता है। इतिहास गवाह है कि दुर्बल की ही बलि दी जाती है। जब हमने शक्ति की पूजा करना छोड़ दिया, तभी विदेशी आक्रांताओं और विधर्मी ताकतों ने हम पर राज किया। आज समय बदल गया है, हिंदू समाज जागृत हो रहा है और अपने खिलाफ आंख दिखाने वालों को जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि संघ का जितना विरोध हो रहा है। संघ उतना ही मजबूत हो रहा है। जो हमसे टकराएगा, वह अंततः हमसे ही मिल जाएगा। संघ का प्रमाणित विरोधी कोई नहीं है। संघ के प्रति किसी के मन में विरोध भाव नहीं है, बल्कि अनुकूलता के साथ स्वीकार्यता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि कभी कांग्रेस ने भी संघ जैसी शाखाएं लगाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके, क्योंकि संघ समर्पण का विषय है। संघ में आकर कुछ मिलता नहीं है, बल्कि जो है वह भी राष्ट्र के लिए समर्पित करना पड़ता है। संघ में आकर व्यक्ति में सद्गुण आते हैं। जिला संचालक डा.यतींद्र नाग्यान ने कहा कि आज ही के दिन 1925 में नागपुर में डा.हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। विजयदशमी का दिन संघ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ जो कहता है, वह स्वयंसेवकों ने पहले स्वयं करके दिखाया और उसके बाद समाज से आह्वान किया। चाहे वह कोरोना काल में सेवा हो, बाढ़ या किसी आपदा में राहत कार्य हो, स्वयंसेवक हमेशा सबसे आगे रहे हैं। इस अवसर पर नगर संचालक एडवोकेट ज्ञानेश ठकराल, जिला प्रचारक जगदीप, नगर प्रचारक तनुज, प्रांत सामाजिक सद्भाव प्रमुख रमेश उपाध्याय, पूर्व कुलपति डा.दिनेशचंद्र शास्त्री, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष डा. नवीन पंत, नगर कार्यवाह डा.अनुराग वत्स, सह कार्यवाह बलदेव रावत, जिला सामाजिक सद्भाव प्रमुख अमित शर्मा, नगर बौद्धिक प्रमुख भूपेंद्र रावत, शारीरिक प्रमुख उमेश मिश्रा, सम्पर्क प्रमुख सुशील सैनी, प्रचार प्रमुख अमित शर्मा, उप नगर कार्यवाह मनोज पाल, कुलदीप, त्रिलोक, अमित त्यागी, मोनू त्यागी सहित सैकड़ों स्वयंसेवक शामिल रहे।

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