दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन
दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। राजलोक विहार में आयोजित काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता डा.मीरा भारद्वाज तथा संचालन डा.सुशील कुमार त्यागी अमित ने किया। वृंदा शर्मा ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर स्वामी दर्शनानंद गुरुकुल के आचार्य मुकुंद देव ने त्वरित अनुष्टुप छंद में संस्कृत श्लोक रचकर दीपशिखा को शुभकामनाएं दी और कहा कि दीपशिखा निरंतर प्रगति की ओर उन्मुख रहे। काव्य गोष्ठी में नवोदित रचनाकारों प्रशंसनीय रचनाएं प्रस्तुत की। सोनाक्षी ने कहा कि सांसों में ही नहीं इरादों में तूफान बनाए रखना। ओजस्वी सनी ने कहा मैं भारत का युवा हूं शब्दों की लौ जगाता हूं। कवयित्री आरती की रचना पिता को समर्पित रही। उन्होंने कहा कि शब्दों से नहीं कर्म से है महान, यही है पिता की पहचान। आचार्य सुभाष जोशी ने कहा कि प्रभात की बेला मनोहर सब का मन हर्षित कर जाती है। वृंदा शर्मा के मधुर गीतों ने सभी को आनंदविभोर कर दिया। हिन्दी और संस्कृत के विद्वान डा.विजय कुमार त्यागी ने संस्कृत गीत सुनाकर वाहवाही लूटी और शुभकामनाएं देते हुए कहा सदा सदा फूले-फले यह कविता परिवार। डा.अशोक गिरि और वरिष्ठ कवि ब्रिजेन्द्र हर्ष ने नवोदित रचनाकारों का मार्गदर्शन किया। चेतनापथ के संपादक अरुण कुमार पाठक ने गीत के माध्यम से कहा आंधियों में दीप जलाए रखना। डा.सुशील कुमार त्यागी ने सुनाया रह रह रोता आज मुसाफिर गम को सहता है। बीहड पंथ अपार। डा.मीरा भारद्वाज ने युवाओं सम्बोधित करते हुए कहा युग के तुम प्रहरी बन जाओ, सुन लो जग की करुण पुकार। धैर्य धरा का बना चुनौती विचित्र हुआ अपना संसार।
2026-04-04













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После первичного улучшения работа не заканчивается. Врач формирует план восстановления: режим воды и питания, ориентиры по самочувствию, критерии «нормальной» динамики, признаки, при которых нужно повторно оценить состояние, и шаги по профилактике рецидива. Такой подход снижает вероятность повторного витка: человек понимает, что слабость и эмоциональная нестабильность в первые дни возможны, не пугается «волны» вечером и не пытается гасить её алкоголем.
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