त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास-श्रीमहंत राजेंद्रदास
पुण्य तिथी पर संत समाज ने किया ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास को नमन
ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास महाराज की 11वीं पुण्यतिथी पर संत समाज ने उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। बैरागी कैंप स्थित निर्वाणी अनी अखाड़े की शाखा टाटंबरी अखाड़े में ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास महाराज के शिष्य श्रीमहंत विष्णुदास महाराज के संयोजन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज ने कहा कि संत केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी आत्मा सदैव भक्तों का मार्गदर्शन करती रहती है। सभी को त्याग, तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास महाराज के विचारों का अनुकरण करते धर्म और मानव सेवा में योगदान करने का संकल्प लेना चाहिए। श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए गुरू परमात्मा का ही स्वरूप हैं। पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास महाराज से प्राप्त शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए उनके द्वारा स्थापित सेवा परंपरा को आगे बढ़ाना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। श्रीमहंत मुरली दास, महंत वैष्णो दास, श्रीमहंत माधो दास मोनी बाबा एवं महंत मोहन दास ने कहा कि ब्रह्मलीन श्रीमहंत चंद्रमा दास विद्वान संत थे। सनातन के प्रचार प्रसार और मानव कल्याण में उनका योगदान सदैव समाज को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि श्रीमहंत विष्णुदास महाराज जिस प्रकार अपनी गुरू परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर महंत नरेंद्र दास, महंत महेश दास, महंत संजय दास, महंत हेमंत दास, महंत रघुवीर दास, महंत रामदास, महंत अमित दास सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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